makar sankranti क्या होता है ? इसकी शुरुआत कैसे हुयी ?


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makar sankranti यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश की खुशी में मनाया जाता है और इसे भारतवर्ष में विभिन्न नामों से जाना जाता है।

makar sankranti क्या होता है ?

makar sankranti का अर्थ होता है ‘मकर राशि में प्रवेश’ और यह सूर्य की उत्तरायण में होने वाली पहली संक्रांति है। इस दिन सूर्य उत्तरी दिशा की ओर बढ़ता है और दिन का समय लम्बा होने लगता है, जिससे ठंडक महसूस होती है और इसे सूर्यपुत्र भगवान सूर्य की कृपा के रूप में माना जाता है।makar sankranti का आयोजन भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न रूपों में होता है, लेकिन इसका एक सामान्य धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ होता है। इसे खेतों में उत्सव के रूप में मनाया जाता है और लोग इसे खेतों में सिर जुकाकर, परंपरागत गीतों और नृत्यों के साथ मनाते हैं।

इसके साथ ही, बाजारों में विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्रियां और उपहारों की बिक्री होती है जो लोग एक दूसरे को भेजकर इस खास मौके की शुभकामनाएं देते हैं।इस दिन को भारतवर्ष में विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे कि पुण्य, उत्तरायण, लोहड़ी, बिहु, माघी और खिचड़ी पूरब। हर क्षेत्र में इसे अपने अपने तरीके से मनाया जाता है लेकिन एक सामंजस्यपूर्ण बात यह है कि यह सभी त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश की खुशी में होते हैं।

makar sankrantiका महत्व अधिकांशत: कृषि आधारित है, जिसे खेतों में बोने जाने वाले फसलों की पैदावार और उनकी अच्छी कुँजी भी माना जाता है। इस दिन को सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सूर्य देव की पूजा का मौका होता है, जिससे लोग सूर्य देव की कृपा और आशीर्वाद का आभास करते हैं।

makar sankranti की शुरुआत कब हुई?

भारतीय ज्योतिषी मकर संक्रांति को सूर्य के मकर राशि (मकर राशि) में प्रवेश करने और शीतकालीन संक्रांति के अंत के साथ-साथ उज्ज्वल लंबे दिनों की शुरुआत के कारण एक खगोलीय घटना के रूप में वर्णित करते हैं। प्राचीन विद्वानों के अनुसार, इस शुभ दिन का जश्न भारत के गंगा के मैदानी इलाकों में लगभग 300 ईस्वी पूर्व शुरू हुआ था।

makar sankranti क्यों मनाते है?

मकर संक्रांति, जो हिन्दी कैलेंडर के अनुसार हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है, एक हिन्दू त्योहार है जो सूर्य देवता की पूजा और उत्तरायण के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसे भारतवर्ष में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है और इसे अनेक नामों से जाना जाता है, जैसे मकर संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल, भोगली बिहु, माघी, लोहड़ी, सुङ्क्रान्ति, तिल संक्रांति आदि।makar sankranti का मुख्य उद्देश्य सूर्य की पूजा है, जो इस दिन उत्तरायण के समय अपना मार्ग पूरा करता है और हमें नए सौरमंडल में प्रवेश करने का संकेत देता है। यह एक शुभारंभ का संकेत माना जाता है, जिससे हरित क्षेत्रों में फसलों का उत्तम प्रदान होता है और किसानों को खुशियों का समय मिलता है।

इस त्योहार को लोग मिठाई, तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, चौले, और खिलते फलों के साथ मनाते हैं। लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खाना बनाते हैं और मिलनसर वातावरण में एक दूसरे के साथ आनंद लेते हैं।makar sankranti का एक और महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है उत्तर भारत में बसने वाले लोगों के लिए यह पर्व किसानों के लिए आशीर्वाद लेकर आता है। इस दिन वे अपने मेहनत और उद्यमिता का उत्सव मनाते हैं और अपने उत्तराधिकारी भूमि की आदान-प्रदान को भी स्वीकार करते हैं।

सम्पूर्ण रूप से, मकर संक्रांति एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्व है जो सूर्य और पृथ्वी के बीच नए संबंध की शुरुआत का समय है। इस दिन को खासकर खेती और कृषि से जुड़े लोग उत्सव भरे दिल से मनाते हैं और नए साल की शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हैं।

Makar Sankranti के दिन क्या खाया जाता है?

मकर संक्रांति पर खाने के लिए कुछ लोकप्रिय जो भारत भर में विभिन्न रूपों में बनाए जाते हैं।

  1. तिलगुड़ लड्डू: तिलगुड़ लड्डू एक पौष्टिक स्नैक है जो तिल, गुड़ और घी से बनता है। यह मकर संक्रांति पर बड़े ही पसंद किया जाता है और इसे आसानी से बनाया जा सकता है।
  2. खिचड़ी: खिचड़ी भी मकर संक्रांति पर आम रूप से बनाई जाती है, खासकर उत्तर भारत में। इसमें चावल और उड़द दाल होती है जिसे बनाने के बाद तिल, मूंगफली, और घी के साथ परोसा जाता है।
  3. गजक: गजक एक मिठाई है जो छोटे-छोटे टुकड़ों में बनती है और इसमें तिल, मूंगफली, और गुड़ होते हैं। यह एक पौष्टिक और स्वादिष्ट स्नैक है जो मकर संक्रांति पर खाया जा सकता है।
  4. पूरी-चना: पूरी-चना भी एक लोकप्रिय मकर संक्रांति का विशेष भोजन है। इसमें मैदा से बनी पूरी और मसालेदार चना होता है जो बहुत रूप से सर्दी में आने वाले तिल, रेजिन, और उड़द दाल के साथ परोसा जाता है।
  5. सरसों का साग और मक्के की रोटी: यह एक और पौष्टिक विक्षेपण्य है जो उत्तर भारत में पसंद किया जाता है। सरसों के साग को मक्के की रोटी के साथ सर्दी के मौसम में खाना बहुत ही स्वादिष्ट होता है।

Makar Sankranti के दिन लोग पतंग क्यों उड़ाते है?

मकर संक्रांति को भारत में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन लोग उन्हें विभिन्न रूपों में मनाते हैं। इस दिन लोग विशेष रूप से पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं। पतंगबाजी का आदान-प्रदान मकर संक्रांति के दिनों में बहुत ही लोकप्रिय होता है।makar sankranti का उत्सव सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर को दर्शाता है, जिससे दिन का समय बढ़ने लगता है और बर्फ घटित होने के कारण ठंडक बढ़ती है। इसे ‘उत्तरायण’ कहा जाता है और इसका मतलब है कि सूर्य ने उत्तर की ओर अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पतंग उड़ाने का परंपरागत रूप से मकर संक्रांति के उत्सव में शामिल हो गया है। इसके पीछे एक मान्यता है कि पतंग उड़ाने से शरीर को सूर्य की किरणों का सीधा प्राप्त होता है और यह सेहत के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा, पतंग उड़ाने से लोग समुद्र, नदी और खेतों में भी जाकर बसे हुए पतंगों को बाँधकर उड़ाने का आनंद लेते हैं, जिससे एक साथियों के साथ मिलकर खास रंगीनी और आनंद का माहौल बनता है।

Makar Sankranti के दिन लोगो को कहा घूमने जाना चाहिए ?

मकर संक्रांति को मनाने के लिए कई स्थानों पर विशेष तीर्थ स्थल होते हैं। प्रमुख तीर्थ स्थलों में श्रीनाथजी, प्रयागराज, गंगा सागर, गया, उज्जैन, नासिक, वाराणसी, राजमहेंद्रावरम, त्रियुगन्गा, बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम, ध्वारका, अंबाजी, तुलजापुर, सोलापुर, गोधूमाधन, नागोरी, मुक्तिनाथ, विश्वनाथ, सोनपुर, गोधूमधन, सिंहस्थ, और कुरुक्षेत्र आदि शामिल हैं।

मकर संक्रांति को इन स्थलों पर भगवान की पूजा-अर्चना के साथ ही स्नान किया जाता है ताकि लोगों को शुभ फल और मोक्ष की प्राप्ति हो। इन स्थलों पर भगवान के दर्शन करने से भक्तों को आत्मा का शांति और प्रेम मिलता है, जो उन्हें आध्यात्मिक सफलता की प्राप्ति की दिशा में मदद करता है।

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